Friday, 21 August 2009

वाटर वार्स

गाँव की और । लहराती टेढी मेढी सड़क। खेत ही खेत । धन की फसल। पटवन का समय ।
अरे! सामने लोगों की भीड़।
हाथ मैं डंडे, भाले।
"क्यों भाई, चक्कर क्या है, यह बवाल कैसा।"
"क्या बताएं साहबजी, पीछे के गाँववालों ने नहर का पानी रोक लिया। हमारी फसलें सूख रही हैं, सारा पानी उनके खेतों में....."
मानसून में गड़बड़। नदी में पानी कम। नेहर मैं पानी कम। खेत मैं पानी कम। पेट मैं खाना कम।
येही है वाटर वार्स (पानी का झगडा)

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