Monday, 17 August 2009

शिक्षा मित्र

दो महिलाओं की शिक्षा मित्र में नई बहाली

"हमें मेहनत से काम करना चाहिए ताकि हम जल्दी परमानेंट हो जाएँ।

शिक्षिका क्लास में पढाती हुई। प्रधानाध्यापक उधर से गुज़रते हुए।
"मैडम आपको क्लास में बच्चों को पढ़ना नहीं चाहिए।"
"प्रिंसिपल साहब मज़ाक कर रहे होंगे।"

अगले दिन। शिक्षिका क्लास में पढाती हुई। प्रधानाध्यापक उधर से गुज़रते हुए।
"क्या कहा था मैंने आपको। आप इन बच्चों को पढाइये मत। बस क्लास में बैठिये, बच्चा लोग को कंट्रोल कीजिये, टाइम काटिए।"
"ये कैसा मज़ाक है, करें क्या हम लोग?"

कुछ दिन बाद। एक शिक्षिका के पति उन्हें लेने स्कूल आए।
"आप तो समझदार लगते हैं। अपनी पत्नी को समझाए ज़रा की ऊ बच्चा लोग को पढाएं नै। ऊ पढायेंगी, अ सब पढ़ले लिखल हो जाएगा त खेत में काम कौन करेगा, हम्मर अल्लू के रोपेगा।"

बेचारे प्रिंसिपल साहब। इतना दिन लगा उनको सिस्टम बनने में, अ ई नेकी मैडम आके उनका सिस्टम ख़राब कर रही हैं। गज़ब बात है भाई।
ये है हमारा सर्व शिक्षा अभियान। और ये हैं हमारे शिक्षा मित्र।







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