Thursday, 3 September 2009

पुलिसिया बाबा

पुलिस मैं बड़े अफसर। कितने लोगों की जान बचाई।
कितने जुर्म रोके। कितने लोगों की जिंदगी बेहतर की।
कितनी सेवा की देश की।

यह हैं हमारे संजय कुमार सिंह।
बड़े ही गुड लुकिंग। बड़े ही स्मार्ट। एक "पर्फेक्ट मैन।"

आज भी उतने ही स्मार्ट हैं। उतने ही गुड लुकिंग हैं। और अब तो "पर्फेक्टेस्ट मैन" हैं।

बदला क्या है?
पुलिसिया स्मार्ट कपड़ों की जगह भगवा वस्त्र धारण कर रखा है।
रोज़ शवे करने वाला आदमी लम्बी दाढ़ी के साथ है।
पॉलिश किए हुए चमकते जूते पहनने वाला लकड़ी की खरावं पहने हुए है।
मांस, मछली और मदिरा के माहोल मे रहने वाला आज सिर्फ़ सात्विक भोजन करता है और अक्सर व्रत भी।
भटके हुए लोगों को डंडे से ठीक करने वाला आज अपनी बातों से उनको सही रास्ते पर ला रहा है।

ये हैं हमारे "पुलिसिया बाबा"।
लोग मानते हैं की बाबा लोग पुराने ज़माने के विचारों वाले होते हैं। उन्हें अंग्रेज़ी नहीं आती है। वोह पुराने ख्यालों के होते हैं। कई जो कुछ नहीं कर पाते जीवन मे वो बाबा बन जाते हैं।
यह हैं हमारे नए बाबा। माडर्न। अंग्रेज़ी मैन पारंगत। हिन्दी मैन पारंगत। और भी कई भाषाओँ का ज्ञान रखते हैं।
और भी कई काम कर सकते थे जीवन मैन। एक सफल जीवन वैतीत कर रहे थे।
लेकिन इश्वर का बुलावा आया और जो ज्ञान मिला इस्वर से वोह अमृत औरों को पिलाने निकल पड़े सब छोड़ चाद के।

वह रे मेरे हिन्दुस्तान। तेरे जलवे निराले।

आज बाबा का बड़ा आश्रम है, २०० एकर का। और भी कई आश्रम हैं कई जगहों पर।
बड़े बड़े नेता, अफसर आते हैं सर झुकाने, चढावा चढाने। आश्रम मैन एन केन प्रकारेण गाड़ियां हैं, हलिकाप्टर है। लाखों का चढावा चढ़ता है रोज़।
क्या ये सब हो पता अगर पुलिस की नौकरी मे होते। पता नही।

वह रे मेरे हिंदुस्तान तेरे जलवे निराले।

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