Saturday, 19 September 2009

गाय, भैंस और हमारे नेताजी

सुना है आज कल इंसानों की तुलना गायों से की जा रही है।
इससे भी बड़ी बात, कुछ नेता ऐसा कर रहे हैं और कुछ नेताओं को इसका बुरा लग रहा है।

हमारी भोली गौ माता। उनसे तुलना तो हमारे लिए इज्ज़त की बात है।
वैसे जिन्होंने ये तुलना की उनका इंसानों की बेचारे बेजुबान जानवर से तुलना करने की मंशा बिल्कुल नहीं रही होगी।

मैं बस यह सोच रहा था की ये नेता इंसान और गाय की तुलना को भूल यह क्यों नहीं सोच रहे की आम आदमी की परेशानियां और देश की समस्याओं की बारे मैं विचार करने और उनके समाधान निकालने की अपेक्षा उनसे रखना "भैंस के आगे बीन बजाने" जैसा हो गया है।

जी हाँ नेता जी। आप ही से कहा। आप तो बिल्कुल भैंस की तरह हो गए हैं।

"भैंस के आगे बीन बजाये (आम जनता), भैंस खड़ी पगुराए (नेताजी जिनकी भी सरकार खड़ी होती है)।

तो कृपया गाय को भूलें और अपने भैंस के अंदाज़ को बदलें। आम जनता न सही आप ही गाय बन जाएँ जो कम से कम देश के लोगों को दूध (उन्नती) दे।

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