Sunday, 20 September 2009

ईट हैपेन्स ओनली इन इंडिया

हिंदुस्तान माडर्न हो रहा है। चीज़ें बदल रही हैं।
हम पस्चिमी सभ्यता को आजमा रहे हैं, अपना रहे हैं।

इन सब का एक बहुत बड़ा उदाहरण मिलता है आज कल के मॉलों में।
नए तरेह की दुकानें, नए परिधान। नए रूप रंग, नए ढंग।

एक मॉल में सुबह सुबह। दुकाने अभी अपनी उंघती आंखों से पलकें उठा ही रही हैं।
ऊपर शीशे की छत से चन कर आती रौशनी मॉल के वातानुकूलित वातावरण को हल्का हल्का ठंढा कर रही है।

बेंच पर बैठा एक लड़के के कानों में आई पॉड की झंकार गूँज रही है।
एक खूबसूरत लड़की उसकी ओर आरही है।

लड़की आकर बगल में बठी। हाथ में एक डायरी जैसी चीज़ है।
डायरी खुली।
अरे! हनुमान चालीसा।
लड़की मंत्र बुदबुदा रही है। जल्दी जल्दी चालीसा ख़त्म करी है।

डायरी बैग के अन्दर गई। बैग से मोबाइल निकला।
कान में ईयरफोन लगाया। आगे बढ़ गई लड़की।

यही है असली भारत। नई चीज़ को भी अपनाया और पुराना भी नहीं गवाया।

ईट हप्पेंस ओनली इन इंडिया।


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