Sunday, 27 September 2009

वह रे पॉलिटिक्स

"जब हवाई जहाज में जाएँ तो आम श्रेणी में ही सफर करें"
आज कल यह होड़ लगी है जन सेवकों (माने हमारे नेता ) में।

किसी कोई होटल का आरामदायक कमरा खाली करने का आदेश मिल रहा है। कोई विमान में आम श्रेणी में सफर कर रहा है।

एक महाशय तो अपनी पुरी सुरक्षा की बटालियन ले कर ट्रेन में सफर करने लग गए। ये तक न सोचा की आम आदमी के सफर पर इसका क्या असर पड़ेगा? क्या स्टेशन पर औरों को परेशानी होगी? ज़रूरत क्या है सोचने की, हम तो आम बन गए, आम आदमी के साथ हो गए। तो फिर आम आदमी को अब और क्या परेशानी?

जिंदगी भर जो लोग ख़ास रहे हैं। जिंदगी भर जो लोग ख़ास रहेंगे।
जिन्होंने आज तक ख़ास श्रेणी में सफर किया है विमानों में, ख़ास हेलीकॉप्टर मंगवाए हैं अपनी यात्रा के लिए।
वो आज आम बनने की होड़ में लगे हुए हैं।

वह रे पॉलिटिक्स! क्या क्या न करवाए तू?

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