Thursday, 1 October 2009

दुखी हूँ एक जैसे नोटों को देख कर

१० का नोट। राष्ट्रपिता
२० का नोट। राष्ट्रपिता
५० का नोट। राष्ट्रपिता
१०० का नोट। राष्ट्रपिता
५०० का नोट। राष्ट्रपिता
१००० का नोट। राष्ट्रपिता

परेशान हूँ मैं।
नहीं नहीं, राष्ट्रपिता से नहीं।
नोटों से।

थोड़ा मोनोटोनस सा हो गया है।

इससे भी ज्यादा, शायद जिस देश का ये किस्सा है, वहां महान लोगों की कमी नही है।
ऐसे लोगों की कमी नही है जिन्होंने राष्ट्रनिर्माण में गहरा योगदान किया है।

तो फिर परेशानी क्या है? क्यों नहीं मौका मिल सकता है और लोगों को?

अमेरिका के नोट बड़ा प्रभावित करते हैं। अलग अलग नोटों पर अलग अलग लोगों की तस्वीरें।
२ फायदे हैं। एक तो काफ़ी लोगों को समान मिला है। और काफ़ी ज्ञानवर्धक हैं।
उस देश के इतिहास मैं महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लोगों की जानकारी।

इस देश मैं भी थोडी वेराएटी मिले तो मज़ा आ जाए।

जय हो राष्ट्रपिता की।

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