Thursday, 29 October 2009

चाटा स्काई

पार्ट 1: मैच का मज़ा
अरे भाई भारत मैच हार गया।
क्या बात कर रहे हो? मैं नहीं मानता। तुम्हें कैसे पता की हार गया?
मैच तो नहीं देख पाया यार लेकिन समाचार में देखा और रास्ते में लोगों से सुना।

सुनी सुनाई बात। हुंह! मैं नहीं मानता। मेरे 'चाटा स्काई' पर मैच रिकॉर्ड हो रखा है। मैं तो उस पर मैच के मज़े लूँगा।

मज़े कैसे भाई। मैच का फ़ैसला तो हो चुका है। रिजल्ट आउट होने के बाद क्या मज़ा?

हुह! तुम्हें क्या मालूम। तुम्हारे पास तो नहीं है 'चाटा स्काई'।

पार्ट 2: सिनेमा रिकॉर्ड कर के देखो
बड़ा हीरो: अरे यार! जब टीवी पर अच्छी पिक्चर आ रही होती है तब ही बीवी को डिनर के लिए बहार जाना होता है।
आम आदमी: हाँ यार! मेरे साथ भी ऐसा होता है।
बड़ा हीरो: लेकिन मैं तो डिनर से वापस आके पिक्चर देख लूँगा क्योंकि वो मेरी 'चाटा स्काई' पर रिकॉर्ड हो रही है।
आम आदमी: लेकिन मैं तो डिनर से पहले ही देख चुका हूँ 50 रुपये की डीवीडी भारे पर लाके। कौन वोह रिकॉर्डिंग को एड्स(प्रचार) के साथ देखे। 3 घंटे की पिक्चर रिकॉर्ड कर के 6 घंटे मैं।
बड़ा हीरो: हुह! तुम्हें क्या मालूम। तुम्हारे पास तो नहीं है 'चाटा स्काई'।

पार्ट 3: फैमली डिनर
बड़ा हीरो: हमारी फैमली कुछ अलग है। हमलोग एक दूसरे के साथ डिनर करते हैं न कि टीवी के साथ।
आम आदमी: वह भाई! कमाल। वोह कैसे? फिर अपने दिन के कोटे का एन्टरटेनमेंट कैसे पूरा करते हो।
बड़ा हीरो: अरे यार! वोह हो रहे हैं न हमारे फेवरेट सीरियल रिकॉर्ड हमारे 'चाटा स्काई' पर।
आम आदमी: यार ये मेट्रो जीवन में आदमी 8 बजे काम से घर वापस आता है। फ्रेश होके 9 बजे खाने पीने बैठता है। उसके बाद अगर 9-11 देखने वाले सीरियल एक घंटे खाना खा के 10-१२ रिकॉर्ड कर के देखे तो सूयेगा कब और 8 बजे शुरू होने वाले ऑफिस के लिए पहुचेगा कब।
खैर ये सब छोड़ो, यह बताओ कि अगर खाते वक्त टीवी नहीं देखते तो फैमली डिनर में करते क्या हो?
बड़ा हीरो: बिना एक दूसरे से बातें किए चुप चाप खाना खाते हैं। टीवी पर देखा नहीं क्या तुमने?
हुह! तुम्हें क्या मालूम। तुम्हारे पास तो नहीं है 'चाटा स्काई'।

वह रे नए जमाने के सपूत 'चाटा स्काई'।
हम 'शेयर टेल डिजिटल' वाले (बन्दर) क्या जाने 'चाटा स्काई' (अदरक) का स्वाद।

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