Friday, 30 October 2009

ई मेल का ऑपरेशन

एक ई मेल आया:
विश्व की एक बहुत बड़ी कंपनी अपना पैसा लोगों के साथ बाँटना चाहती है। अगर आप इस ई मेल को आगे भेजेंगे तो हर एक ई मेल के लिए आपको ४०० डालर मिलेंगे।

बस फिर क्या, पूरी एड्रेस बुक खोली और सबको भेज दिया ई मेल।
विचार: ई मेल आगे भेजने में मेरा कोई पैसा तो लग नहीं रहा है। तो क्यों न चांस ले लूँ?
जिसको मेरी तरफ़ से ई मेल मिलेगा उसे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए मेरी तरफ़ से मिले एक ई मेल से। (जिसे अंग्रेज़ी में 'विन विन सिचुएशन' कहते हैं)
और फिर अगर ऐसा कोई चांस बनता है तो और लोग भी फायदा उठाएं उसका (ऐसा नहीं सोचा था मैंने)।

खैर इस 2 सेकंड के विचार पर और कुछ बिना सोचे समझे मैंने लोगों को भेज दिया ई मेल।

कहाँ सोचा था मैंने कि ये ई मेल मेरे गले का कांटा बन जाएगा।

कहाँ मैं और कहाँ मेरे दोस्त। मेरे कुछ समझदार और बुद्धिमान दोस्त हैं। हॉस्टल में उनके लिए एक ख़ास शब्द इस्तेमाल करते थे, 'इंटेल'।

तो मेरे इन इंटेल दोस्तों ने मुझ पर मेहेरबानी कर के अपना समय लगाया और इस ऐ मेल के बारे में तरह तरह के जवाब भेजे।

इंटेल 1: यारों, तुमने उस ऐ-मेल में कंपनी के निशान पर ध्यान नहीं दिया? (शायद निशान ग़लत रहा होगा)।
बारीकी पर ध्यान देन जनाब। कितना ख्याल है मेरे मित्र को।

इंटेल 2: यारों, अगर यह लोग 400 डालर इस दुनिया के हर एक आदमी को देने लग गए तो यह जो संख्या आयेगे वोह तो पूरे विश्व के सकल घरेलू उत्पाद से भी ज्यादा हो जाएगा। इस तरह कि चीज़ पर विश्वास कैसे कर सकते हो? यह तो इम्पासिबल है।
कैलकुलेशन और ऍप्लिकेशन पर ध्यान देन जनाब। वैसे मेरे पास इतनी अक्ल होती तो मैं इस ई मेल को आगे नहीं बढाता बल्कि डिलीट कर देता।

इंटेल 3: क्यों बे, अपनी मेहनतt पर भरोसा नहीं है तुझे?
अब इसका विश्लेषण क्या करूँ मैं। साफ़ झलक रहा है कि मेरे यह मित्र कितना मेरा उत्साह वर्धन करने कि कोशिश कर रहे हैं ओज पूर्ण भाषा का प्रयोग कर के।

तो दोस्तों आप देख ही रहे हैं कि कितनी बारीकी रखते हैं मेरे मित्र। मैं जितना समय नहीं व्यतीत कर पाया इस ई मेल पर, मेरे दोस्तों ने उससे कहीं ज्यादा समय लगाकर चिंतन और विश्लेषण किया इसका।
इसके लिए उनका हार्दिक धन्यवाद।

वैसे मुझे इन जवाबों के बाद ये भी एहसास हुआ कि मेरे इस ई मेल को आगे बढ़ाने से कई लोगों को परेशानी भी हुई है। इसके लिए मैं तहे दिल से छमा याचना करता हूँ उनसे। इस परेशानी के बारे मैं ही सोच कर मैंने छमा याचना का ई मेल नहीं किया कि और ई मेल भेजने से कहीं उनके परेशानी न बढ़ जाए। मेरी इस चुप्पी को ही कृपया मेरे छमा याचना समझें।

आशा है कि ई मेल आने जाने का सिलसिला चलता रहे और साथ ही ऑपरेशन का भी.......

3 comments:

  1. आगे के लिए सीख है, और क्या!! :)

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  2. इस टिप्पणी के माध्यम से, सहर्ष यह सूचना दी जा रही है कि आपके ब्लॉग को प्रिंट मीडिया में स्थान दिया गया है।

    अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं।

    बधाई।

    बी एस पाबला

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  3. @उड़न तश्तरी: सच ही कहा आपने, सीख ही है यह. लेकिन आप ही बताएं सीख किस बात की, इ मेल न भेजने की या इंटेल दोस्त न पालने की.



    @बी एस पाबला: इस जानकारी के लिए आपका बहुत बहुत आभार प्रकट करता हूँ. यह न्यूज़ सुन कर काफी हर्षित महसूस कर रहा हूँ.

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