Tuesday, 3 November 2009

मेरी वाली

बिहार का कॉलेज:

एक लड़के को एक लड़की पसंद आ गई।
लड़की को पता नहीं।

एक दूसरा लड़के ने लड़की को लाइन मारी (कैसे मारते हैं मत पूछियेगा, कोई डेफिनिशन नहीं है अक्चुअली)।

पहले लड़के ने पकड़ के उसे बहुत पीटा।
"साले! 'मेरी वाली' को लाइन मारता है।"

सवाल: क्यों भइया? लड़की आपकी बपौती है क्या? आपके लड़की को देखते ही एन्गेजमेंट हो गई है उससे आपकी?

मिलता जुलता किस्सा:
तुम जो कर रहे हो वो सही नहीं है। ऐसे भगवान् अप्रसन्न हो जायेंगे।
तुम जीवन सही नहीं जी रहे हो। ये तरीका नहीं है भगवान् को पाने का।
मैं जो बता रहा हूँ वो रास्ता सही है। उसपर चलो।

सवाल: क्यों भइया? धर्म और इश्वर आपकी बपौती हैं क्या?

आज कल रोज़ धर्म और इश्वर के एक ठेकेदार पैदा हो रहे हैं।

नोट:मुझे ज्ञान नहीं है कि इस केस में लड़की (इश्वर) को पता है या बस लड़के (ठेकेदार) को वो पसंद आ गई है तो वो बाकी लाइन मारने वालो (अपने तरीक से अराधना करने वाले) को पीट रहा है।




1 comment:

  1. बड़ी विचारणीय पोस्ट डाल दी है भाई, हा हा!!

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