Tuesday, 10 November 2009

माँ सा एहसास: होस्टेस आंटी

एयर इंडिया में सफर (हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों में) करने की एक ही अच्छी बात है।
बढ़िया खाना।

और अगर आपको घर के बाहर होते हुए भी बढ़िया खाना मिले तो क्या बात।
और सोने पे सुहागा, खाना मिले माँ के हाथों से।

बस यही तो यू एस पी है एयर इंडिया की।
बढ़िया खाना माँ तो न सही, लेकिन उनसे बहुत ही करीबी दिखने वाली और व्यवहार करने वाली 'आंटियों'(चाचियों) से मिले। बस मन मोह ले जाती हैं यह अदा।

सेक्टर: दिल्ली से पटना
कैरियर: एयर इंडिया

पटना तक बहुत बार सफर किया है मैंने। कई बार हमारे जैसे ही देसी लोग मिलते हैं हवाई जहाज में। थोड़े सोफेस्टिकेटेड मैनर्स की कमी वाले। इन चीज़ों की जानकारी से अनिभिज्ञ हैं थोड़े।

पैसेंजर एयर होस्टेस से (पानी चाहिए था) : स्स्स्स्स्स्स्स्स्स स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स पानी मिलेगा क्या?
आंटी: नहीं! स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स नहीं बोलते। 'एक्सक्यूज़ मी' बोलते हैं।

खैर! पानी तो पिला ही दिया आंटी ने उन साहब को (बोतल और बातों दोनों से)

माँ सा एहसास,
आपके लिए ख़ास।
आपका ही अपना, एयर इंडिया।

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