Monday, 16 November 2009

औरत और भैंस

राल रंग की सूमो गाड़ी तेज़ी से चली जा रही थी।
गाड़ी मैं दो प्राणी।
एक ड्राईवर
और दूसरे थे एक कंसलटेंट साहब।

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की ये जो कंसलटेंट होते हैं, ये एक ख़ास प्रजाति के लोग होते हैं।
कंसलटेंट होता है एक्सपर्ट।
किस चीज़ का?
साहब कंसलटेंट का काम होता है राय देना। और यह लोग हर चीज़ पर राय दे सकते हैं।
कंसलटेंट को हर चीज़ की जानकारी होती है और वो हर चीज़ पर राय दे सकता है।

तो जो कंसलटेंट साहब सवार थे, वो थे भी बड़े पुराने आदमी। उनकी जानकारी के दायरे में कृषि, पर्यावरण, उर्जा, अर्थव्यवस्था से ले कर बाकि जितनी चीज़ें गिन सकते हैं, आप वो सब चीज़ें थी।
तो आप तो अंदाजा लगा ही सकते हैं उनके ज्ञान का और उनकी कही बात के वज़न का।

तो इस तेज़ चलती गाड़ी के सामने अचाना सड़क पार करने को एक महिला दौड़ी। ड्राईवर दूर से ही होर्न बजा रहा था लेकिन महिला जान देने पर उतारू थी।
बमुश्किल एक्सिडेंट होने से बचा।

ड्राईवर ने कंसलटेंट साहब के सामने अपने सही होने का तर्क दिया।
"साहब में तो दूर से ही होर्न बजाता आ रहा था।"

कंसलटेंट साहब
"अरे बेवकूफ! गलती तुम्हारी ही तो है। तुम्हें पता नहीं है की औरत और भैंस पर होर्न का कोई असर नै पड़ता।"
"औरत और भैंस को होर्न मारोगे तो वो और तुम्हारी ही तरफ़ भागेगी।"
"तो ध्यान से चलाओ। गलती तुम्हारी है।"

तो साहब बच के रहें, 'औरत और भैंस' से।

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