Wednesday, 18 November 2009

किसान और बैल

गाँव का एक घर। घर में ही है पोस्ट ऑफिस गाँव का।
कुर्सियाँ लगी हुई हैं। खटिया बिची हुई थी।
बेदा बाबु (वेद प्रकाश शर्मा) और कंसलटेंट साहब बैठे हुए हैं। और ग्रामीण भी हैं।

बेदा बाबु: 'सर ई खेती से तो इतना परेशान हैं। एगो ट्रक्टर भाड़ा पे चलवाते हैं तो साल में उससे भी खेती से जादे पैसा बच जाता है। खेती में तो कुछ कामे नै चल रहा है।"
कंसलटेंट साहब: "लेकिन बेदा बाबु, सब लोग ट्रक्टर चलवाने लगेगा त खेती कौन करेगा?"

बेदा बाबु: "एगो बात बताते हैं सर।"

"खेत में मेहनत के करता है?
बैल।
उपज जो धान का होता है ऊ खाते हैं हमलोग।
अ बेचारा बैल को त बाजरा भी नै मिलता है खाने के लिए। उसको मिलता है भुस्सा।

बैल कोनो दिन काम करने से मन कर दिया त?
लेकिन बैल ऐसा कर सकता है?

इहे हाल है किसान का सर।"

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