Saturday, 21 November 2009

जनम मृत्यु

जिले का हेडक्वार्टर।
कांसलटेंट साहब कुछ कृषि से सम्बंधित डाटा की तलाश में भटक रहे थे।

कृषि विभाग वाले कृषि मेला को लेकर बहुत बिजी चल रहे हैं। तो साहब आप जाकर सांख्यिकी (स्टेटिसटिक्स) वालों से संपर्क करें।

एक अंधेरे कोठरी। छत पर मकरी के जाले। एक दो पुराने बल्ब लटक रहें हैं छत से लंबे वायर्स के द्वारा। एक बल्ब जल भी रहा है। कमरे में 8-10 पुरानी अलमारियां। अलमारियों से फाइलें और अन्य सरकारी कागज़ झांक रहे हैं। अलमारियों के ऊपर उन्ही फाइलो और कागजों के पहाड़। ऐसी ही हालत कमरे में पड़ी मेजों की भी है।

दो बाबु बैठे हैं। पान को मुह में दबाने ही वाले हैं कि कांसलटेंट साहब ने टोका....
"साहब ये कृषि से सम्बंधित कुछ डाटा चाहिए था।"
"क्या चाहिए?"
"जी यही कुछ उपज, आछादन इत्यादि के बारे में।"
"तो यह सब तो कृषि विभाग में मिलेगा।"
"जी वो तो आज कल बिजी है। कृषि मेला चल रहा है न।"
"अच्छा तो यहाँ तो मिल जाएगा लेकिन....."
(कमबख्त यह लेकिन हमेशा आ जाता है)
"लेकिन ये काम सिया बाबु के जिम्मे है।"
"जी कब तक आएंगे वो।"
"देखिये, कुछ कह नहीं सकते हैं।" "आप ऐसा कीजिये, नगर पालिका में, जनम मृत्यु में चले जाइए।"
"वहां मिलेंगे क्या वो?"
"हाँ उनपे अतिरिक्त भार है, जनम मृत्यु का। सो, देख लीजिये एक बार।""वहां पूछ लीजिये गा, सिया राम सिंह (सिया बाबु) को।"

चल पड़े कांसलटेंट साहब नगर पालिका में जनम मृत्यु की ओर।

नगर पालिका के गेट में एंट्री। बायीं ओर मसाले बेचने वाला। आगे सब्जी की मिनी मंडी लगी हुई है।
आलू, प्याज़, टमाटर, बैगन से सज़ा हुआ है नगर पालिका। साथ ही इन सब से निकली गंदगी। आलू के छिलके, गोभी के पत्ते, प्याज़ के छिलके चार चाँद लगा रहे हैं।
इन सब के बीच में पानी और कीचड़ जमा हुआ।
किसी तरह बचते बचाते, फिसलते संभलते आगे बढे।

नाला बह रहा है। सामने एक टूटा फूटा दो महला घर सा दिख रहा है।
"अरे भाई! ये जनम मृत्यु......?"
"सामने.... ऊपर चले जाइए।"

सकरी सी सीढ़ी। ऊपर पहुचे।
"ये, जनम मृत्यु...?"
"उधर।"

जनम मृत्यु के एक छोटे से कमरे में बैठे एक बाबु। साक्षात चित्रगुप्त। जन्म मृत्यु का हिसाब चल रहा है।
"जी सिया बाबु.....?"
"कहिये, हम ही है।"

पते की बात ये है की जिस विकट जगह पर जनम मृत्यु का पंजीकरण करने वाले ये संकट मोचन, सिया बाबु बैठे हुए हैं, मैं शर्त के साथ कहता हूँ की अगर कोई जनम का पंजीकरण करवाने आएगा तो वापस जाते जाते मृत्यु का पंजीकरण अवश्य करवाता जाएगा।

इश्वर हर पंजीकरण करवाने वाले और उसकी आत्मा को शान्ति दे।

2 comments:

  1. यह तो बढ़िया कथा है । अच्छा लिख रहे है आप ।

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