Wednesday, 25 November 2009

मेहनत की कीमत

रजनीश एक बहुराष्ट्रिय कम्पनी में काम करता है। भारत की, भारत में, अपनी फील्ड में एक अग्रिणी कम्पनी।
हर आम आदमी की तरह वो भी आगे बढ़ना चाहता है।
पैसे, इज्ज़त, ओहदा। वही जो हर (नॉर्मल) इंसान चाहता है।

मेहनत से पसीना बहाता है। फील्ड वर्क पर ऐसी जगह जाना जहाँ लोग जाना नहीं चाहते हैं (सिक्यूरिटी इस्सुज़)।
गर्मी हो या सर्दी, धुप हो या छाव, सूखा हो या बरसात। कभी दौड़ भाग करने में एक बार भी नहीं सोचा।
थ्योरी: मेहनत से इंसान सब कुछ पा सकता है।

रजनीश को मिली उसकी मेहनत की कीमत:
ओहदा: साल दर साल वही जो पहले था
(लोग रजनीश के बाद आए, उसके ऊपर काम किया, गए। और लोग आए, उसके ऊपर काम किया, गए। रजनीश ऊपर न उठ सका, आज भी वहीं है।)
इज्ज़त: वही जो तब थी जब काम शुरू किया था, या शायद उससे कम।
पैसा: मूंगफलियाँ (अंग्रेज़ी में कहते हैं पीनटस)।

हर बार जब रजनीश काम करके ऑफिस लौटता है, तो मन में सोचता है," इस बार बड़ी मेहनत से काम किया है, शायद अब आगे बढ़ने का मौका मिले।"
परन्तु हर बार काम में कुछ कमी, कुछ गलती निकल ही आती है। आज काम भी वहीं है, और रजनीश भी।

शायद गलती रजनीश की ही है। शायद वो काम ठीक से नहीं कर पाता है। शायद आगे बढ़ने के लिए और इम्प्रूवमेंट की ज़रूरत है।

क्नक्लूजन: मेहनत की क्या कीमत है? कोई कीमत नहीं हैं।
कीमत है परिणाम की।
चाहे आपकी गलती हो न हो (पूरी या आधी), अगर काम सही नहीं तो दाम सही नहीं।


2 comments:

  1. सही है, विफल श्रम की कोई कीमत नहीं। वही श्रंम मूल्यवान है जो मूल्य पैदा करता है। मार्क्स भी यही कहते थे।

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  2. कीमत है परिणाम की।-सही कहा!

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