Tuesday, 1 December 2009

तनख्वाह का तमाशा

मीठा है खाना आज पहली तारीख है,
खुश है ज़माना आज पहली तारीख है।

रजनीश को आज न सिर्फ़ तनख्वाह मिलनी है बल्कि उसकी तनख्वाह आज बढ़नी भी है।
पिछले दिनों रजनीश ने काफ़ी मेहनत से काम भी किया है, इसलिए उसे उम्मीद है.......

तनख्वाह बढ़ गई......... 3% का इज़ाफा। आज तो किस्मत खुल गई, पूरे 3% का इज़ाफा।

रजनीश और सुकेश साथ ही काम करते हैं और घनिष्ट मित्र हैं। एक ही ओहदा, एक ही इज्ज़त, एक ही काम।
"क्यों भाई सुकेश कितनी बढ़ी तुम्हारी?"
"भाई 4%"
"क्या???मेरी तो 3% ही।""यह तो नाइंसाफी है।" "मैं चला मालिक से पूछने।"

मालिक से कान्वरसेसन

"सरकार, सुकेश की तनख्वाह 4% बढाई, मेरी 3% ही।""ऐसा क्यों?"
"देखो रजनीश, बात को समझो, सुकेश तुमसे ज्यादा पढ़ा लिखा है। तुमने 2 साल की पढ़ाई की है और उसने उसके बाद 6 महीने और। तो वो ज्यादा पढ़े होने के कारण ज्यादा तनख्वाह कमांड कर सकता है।"
"जैसा आप कहें सरकार।"

रजनीश और सुकेश
"यार सुकेश, तुम्हें वो 6 महीने वाला कोर्स करने का फायदा हो गया। एक ही ओहदा, एक ही इज्ज़त, एक ही काम फिर भी तुम अब ज्यादा तनख्वाह पा सकते हो।"
"यार लेकिन इस हिसाब से तो मुझे नंदिता से ज्यादा मिलना चाहिए। उसकी तो 5% बढ़ी है और मेरी 4 ही। उसने भी तुम्हारी तरह 2 साल ही पढ़ाई की है।"

सुकेश और मालिक
"सरकार, मैंने ज्यादा पढ़ाई की है तो मुझे नंदिता से ज्यादा तनख्वाह मिलनी चाहिए, उसने मुझसे कम पढ़ाई की है।"
"देखो सुकेश, बात को समझो, नंदिता का काम का एक्सपीरिएंस तुमसे ज्यादा है। उसने तुमसे 6 महीने ज्यादा काम किया है।"
"लेकिन मेरी 6 महीने ज्यादा पढ़ाई......."
"नहीं बात एक्सपीरिएंस की है।"
"टीक है मालिक, जैसा आप कहें।"

तो इस प्रकार भाइयों और बहनों, आज की बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मोटो है
"काम में नो कॉमप्रोमाइज, और दाम में हेरा फेरी।"




1 comment:

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