Sunday, 6 December 2009

मेहनत की कीमत २

मेहनत की कीमत क्या है?

सतीश कई सालों से सरकारी कर्मचारी है। मेहनत से काम करता है। खून तो नहीं पर पसीना बहुत बहाता है।
इमानदारी से काम करने की वजह से कई बार तबादले हुए हैं। लेकिन मेहनत और इमानदारी का कीड़ा गया नहीं।
वैसे यह भी मानना पड़ेगा कि सतीश के काम से उसके बॉस खुश भी रहते हैं (उनपर लोड कम पड़ता है)।

15 साल कि नौकरी के बाद सतीश को और पढ़ाई करने के कीड़े ने काट लिया। फोरेन के किसी देश जा कर पी एच डी करना चाहता है। परीक्षाएं दी। सफलता भी मिली।
इंग्लैंड कि एक बड़ी यूनिवर्सिटी के एक मशहूर प्रोफेसर ने सतीश को पूरी स्कालर्शिप देते हुए अपने साथ पे एच डी करने का मौका दिया। गोल्डेन आपर्टूनीटी।
अब बस 2-3 साल कि छुट्टी चाहिए। इतने साल इतनी मेहनत से काम किया। सब लोग काम से खुश रहे हैं। छुट्टी मिलने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
अपलाय किया। अर्जी खारिज।
सतीश के एक और सहकर्मी ने भी इसी तरह के कार्य के लिए छुट्टी कि खातिर अपलाय किया परन्तु उसकी अर्जी मंज़ूर हो गई। ऐसा क्यों? कारण क्या था?

कारण सिम्पल है साहब। सतीश ने काफ़ी मेहनत की है और उसके सहकर्मी ने उतनी नहीं। सतीश काफ़ी काम करता है पर उसका सहकर्मी उतना काम नहीं करता। सतीश की मेहनत से उसके बॉस पर लोड कम रहता है। सतीश के जाने से बॉस को ज्यादा काम करना पड़ेगा पर सहकर्मी के जाने से ऐसा कुछ नहीं होगा।
तो साधारण सी बात है की बॉस सतीश को जाने नहीं दे सकता है क्योंकि फिर उसकी जिंदगी मुश्किल हो जायेगी। सतीश की जिंदगी कैसी भी रहे इससे किसी को क्या वास्ता।

तो साहब क्या कीमत है मेहनत की?
मेहनत की कीमत है "और मेहनत"।

1 comment:

  1. यही होता है जी..बहुत केस देखे हैं ऐसे!!

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