Tuesday, 15 December 2009

अगले जनम इन्हें बिटिया ही दीजो

बड़कू के लिए रिश्ता आया है। चौबे जी की लड़की का।
बड़ा अच्छा परिवार है। चौबे जी की 4 बीवियों से 6 बेटियां हैं।
और आख़िर में इश्वर की दया से एक बेटा।

पुत्र मोह में क्या क्या पापड़ बेले।
4 विवाह। लोग तो एक सह नहीं पाते हैं। और चौबे जी ने 4 किले फतेह किए।
आज कल की दुनियां में लोग एक बेटी के विवाह के लिए परेशान रहते हैं। चौबे जी 4 को निबटा कर पांचवी का काम तमाम करने निकले हैं। छठ्ठी तक पहुचते पहुचते छठ्ठी का दूध न याद आ जाए।

पुत्र का पता नहीं कौन सा ऐसा मोह था जो चौबे जी ने इतने युद्ध लड़े। वंश के ख़त्म होने का भय या दहीज़ की इक्षा?
खैर जो भी बात रही हो चौबे जी की कथा सुन कर अनायास ही मेरे मन से आवाज़ आई....

अगले जनम भी इन्हें बिटिया ही दीजो........

2 comments:

  1. बहुत सटीक!!


    खुद ही आँख खुलेगी जब यही इकलौता बाबू बुढ़ापे में दुत्कार मारेंगे और बेटियाँ सहारा बनेंगी..

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  2. वाह बेहतरीन लेखक हैं आप,
    आपके इसी लेख को www.moorkhistan.com पर
    आपकी ब्लॉग उरल के साथ प्रकाशित किया गया है. अगर आपको इस पर कोई आपत्ति हो तो कृपा कर के लेख पर कमेन्ट करे.

    और हाँ ऐसे ही बेहतरीन लेख लिकते रहें. मूर्खिस्तान.कॉम पर आपके लेख के प्रकाशन पर बधाई.

    माधो दूरदर्शी
    मूर्खिस्तान.कॉम के रचनाकार.
    www.moorkhistan.com [The Country of Fun]

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