Friday, 1 January 2010

ब्रह्मचारी सिंह

डॉक्टर साहब के पास बैठा था मैं।

एक मरीज़ आकर लेटा बेड पर।
"क्या नाम है आपका?"
"जी, ब्रह्मचारी सिंह"

ये सुनते ही मन से आवाज़ आई....
"इस बेचारे को तो परिवार वालों ने मौका भी नहीं दिया। पैदा होते ही नाम ही ऐसा रख दिया की कोई चांस ही न मिले लाइफ में।"

"किसने रखा आपका ये नाम।"
"जी चचा रखे थे।"

मन में फिर विचार उठा....
"ज़रूर चचा का इनके बाबूजी से कोई ज़मीन का झगडा रहा होगा। तभी इस तरह से बदला लिया बेचारे से।"

डॉक्टर साहब ने पुछा, "कितना बाल बच्चा है?"
मन में फिर आवाज़ उठी...
"जिसका नाम ही ब्रह्मचारी सिंह, उस बेचारे से बच्चों की बात कर के क्यों उसके ज़ख्मों पर नमक डालते है?"

"जी छौ (6) गो बच्चा है।"

मन हैरान रह गया ये सुन कर....
"हे भगवान्! नाम ब्रह्मचारी सिंह और बच्चे 6 ।"


साहब यही विडम्बना है। जब ब्रह्मचारी सिंह के ही छह बच्चे हें तो पता नहीं कामता (काम-ता) प्रशाद, कमलेश्वर(काम- लेश्वर) यादव और बाकियों ने क्या किया होगा?

जय हो मेरे देश। तेरी जय हो।

2 comments:

  1. नव वर्ष की शुभकामनाएं.

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  2. जय हो ब्रह्मचारी जी!!


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    - यही हिंदी चिट्ठाजगत और हिन्दी की सच्ची सेवा है।-

    नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ!

    समीर लाल
    उड़न तश्तरी

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