Monday, 18 January 2010

मोक्ष

ये 'मोक्ष' क्या चीज़ है?

मैं आज तक समझ नहीं पाया। शायद मेरे जैसा 'अज्ञानी' समझ भी न सके।
मेरे लिए तो 'मोक्ष' एक बियर बार, एक डिस्को और एक कॉलेज महोत्सव का नाम है।

कुछ लोग कहते हैं की जीवन में अच्छे कर्म करोगे, सही राह पर चलोगे तो मोक्ष की प्राप्ति होगी।
और ये भी सुना है की ये 'मोक्ष' लौकिक 'चीज़' नहीं है, अलौकिक है। दूसरे लोक की।
जब इसकी प्राप्ति होगी तो हम कहीं और होंगे।

पता नहीं इस लोक पर मौजूद किसी प्राणी ने मोक्ष का अनुभव किया है या नहीं। प्रोबबिलिटी कम है, क्योंकि 'मोक्ष' तो है की अलौकिक। अब ये 'चीज़' जिसको किसी लोकिक प्राणी ने अनुभव नहीं किया है, उसको प्राप्त करने के लिए होड़ मची हुई है।

कुछ लोग तर्क देते हैं, कि वेदों और पुराणों में लिखा हुआ है इसके बारे में और इसको प्राप्त करने की विधि के बारे में।

तो माज़रा ये है। कुछ पुरानी पुस्तकें हैं जिनकी बताई विधि पर हम अपनी खिचड़ी पका रहे हैं।
ये किताबें उन कालों की हैं जब सभ्यता का प्रारंभ ही हो रहा था।

मुझे ये मामला कुछ गाजर और छड़ी (कैरट एंड स्टिक) का लगता है।
समाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए और जन जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आज भी सरकारें, समाज इत्यादि इसका इस्तेमाल करते हैं। तब भी शायद यही किया गया हो। (शायद... में इतना 'ज्ञानी' नहीं हूँ कि पक्का बता सकूँ)।
खैर लोग अच्छे कर्मों में लगें, एक दूसरे से सामंजस्य बनाये रखें, सुविचार बढ़ें, शायद ऐसी बातों को ध्यान में रख कर इसका इजाद हुआ।
अगर आप इस मार्ग पर चलें तो आपको 'गाजर' मिलेगी यानी 'मोक्ष'
और अगर नहीं चले तो 'छड़ी' लगेगी यानी आप अधर में ही लटके रहेंगे या फिर और किसी निम्न प्राणी (कुत्ता, सूअर इत्यादि) के रूप में आपको पृथ्वी पर जीवन यापन करना पड़ेगा।

लेकिन मेरे लिए तो ये सब काफी मुश्किल है। में इस संसार के मोह जाल में फस गया हूँ।
मैं इस धरती पर मिलने वाले 'मोक्ष' ( बियर बार, डिस्को इत्यादि) को प्राप्त करने के पीछे पड़ गया हूँ।

वैसे भी जिसको इस लोक के किसी प्राणी ने देखा नहीं, पाया नहीं, जिसकी कोई गारेंटी नहीं, उसको प्राप्त करने के लिए जिसकी गारेंटी है उसको क्यों छोड़ूं?

जीवन के बाद के जीवन के लिए इस जीवन को न जीऊँ? बहुत नाइंसाफी है।

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