Thursday, 21 January 2010

सबसे बड़ा वैज्ञानिक: इश्वर

ऊपर वाला भी गज़ब दिमाग लगाता है। पानी जैसी चीज़ बना दी, जिसके बिना जीवन का होना असंभव है।
और दिया भी तो इतना पानी। धरती का 75% हिस्सा पानी।
उसी की कहानी है ये।

इश्वर 1: ये धरती जो जगह है, वहां कोई ऐसी चीज़ देते हैं जिससे वहां जीवन आबाद हो सके।

इश्वर 2: अरे सर, वो है न चीज़, जो हमने मंगल ग्रह पर डाली थी। क्या नाम था उसका। अम्म्मम्म्म्मम्म
अरे वही जो बहता है, जिसका कोई रंग नहीं है। अम्म्मम्म्म्मम्म

इश्वर 3: अबे, पानी की बात तो नहीं कर रहा है?

इश्वर 2: हाँ हाँ, वही वही।

इश्वर 1: आईडिया, तो अच्छा है। और मंगल से पानी निकालने के बाद अपने पास स्टॉक भी पड़ा हुआ है।

इश्वर 3: लेकिन सर.......धरती पर हम तो आगे वो इंसान को भी डालने का प्लान कर रहे हैं न।

इश्वर 2: तो उससे क्या?

इश्वर 3: एक्चुअली, आपको याद होगा वो मंगल पर हमने 'इडियट' (तकनीकी भाषा है। आम भाषा में इंसान) वर्सन1 डाला था। आप लोगों ने देखा कितनी बर्बादी मचाई उसने वहाँ। फाइनली हमें वहाँ से सब कुछ निकालना पड़ा और दूसरा ग्रह ढूंढना पड़ा।

इश्वर 2: अरे सर, वो तो टेस्ट रन था। उसके बाद तो टेकनोलोजी इतनी आगे बढ़ी है। अब तो हमलोगों ने ये 'इडियट' (इंसान) के भी नए वर्सन बनाए हैं। अभी तो हमलोग 'इडियट' वर्सन5 पर हैं। ये पहले से ज्यादा समझदार है। प्रोसेसर (मस्तिस्क) का नया वर्सन लगाया है। और ये पहले से बेहतर काम कर रहा है।

इश्वर 3: लेकिन सर हमारे पास पानी का इतना ही स्टॉक है अब। अगर आपके इस 'इडियट' वर्सन5 ने कुछ गड़बड़ की तो फिर और कहीं और कोई प्राणी नहीं बना पायेंगे हम लोग। और 'जीवन' समाप्त हो जाएगा।

इतनी देर इश्वर 1 इस वार्तालाप को सुन रहे थे।

इश्वर 1: देखिये ये 'इडियट' पहले से बेहतर है इसमें कोई मतभेद नहीं है। लेकिन ये 'इडियट' इडियट प्रूफ है इसकी कोई गारेंटी नहीं हैं। इश्वर 3 की बात जायज़ है। अगर गड़बड़ हुई तो सब ख़त्म हो जाएगा। तो असल मसला है कि पानी को 'इडियट प्रूफ' कैसे बनाएं।

इश्वर 3: एक आईडिया है मेरे पास सर। वो जो आपने बनाया था न सर, क्या नाम था उसका...... हाँ, नमक। ऐसा करते हैं सारे पानी में नमक मिला.....

इश्वर 2: अरे यार, ये नहीं हो सकता। अभी तक इडियट नमक वाला पानी पीने लायक नहीं हुआ है। वो काम नहीं कर पायेगा। इसके अलावा बाकी जो थल प्राणी बनाये हैं हम लोगों ने वो भी नमकीन पानी के साथ काम नहीं कर पायेंगे।

इश्वर 3: सर, नंबर 2 को बोल दीजिये बीच में न टोके। पूरी बात सुनो भाई।
नमक मिला देते हैं। और सूर्य देव को कह देते हैं की वो अपनी गर्मी से पानी को नमक से अलग करें और ज़मीन पर 'थल प्राणियों' के लिए गिरा दें ताकि आपका नया इडियट और बाकी प्राणी अपना काम चला सकें। इससे क्या होगा कि, जितना पानी डालेंगे पृथ्वी पर उसका सिर्फ 5% आपके इडियट के हिस्से में आएगा। एक तो हमारा बाकी पानी खराब होने से बच जाएगा। और आपका इडियट कम पानी में जीने के लिए ट्रेन हो जाएगा (शायद)।

इश्वर 1: वाट एन आईडिया सर जी। यही करेंगे हमलोग। पानी, नमक, सूर्य देव। अल्टीमेट कम्बिनेसन।

तो आखिर इन सारे वैज्ञानिकों ने मिलकर ये गज़ब आईडिया निकाला।
सफल हुआ या नहीं ये सोचना हमारा काम है। लेकिन आईडिया बहुत बढ़िया था। सारा पानी दे दो लेकिन इस्तेमाल करने को सिर्फ थोडा सा दो।
डबल फायदा।

खैर, ये भी बता दूँ की इश्वर 1 मैनेजमेंट वैज्ञानिक थे, इश्वर 2 आई टी वज्ञानिक थे और इश्वर 3 केमिकल वैज्ञानिक थे। टीम वर्क कर के ही इस धमाकेदार धरती को बसाया उन्होंने।
टीम में और भी इश्वर थे जिनकी बात हमलोग आगे के पोस्टों में करेंगे।


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