Wednesday, 27 January 2010

साथ साथ आगे बढ़ें

जब लोग अपने करियर की शुरुआत करते हैं तो कई तरह की चीज़ें ढूंढते हैं। कुछ लोग बड़ी कंपनी के साथ काम करना चाहते हैं (बड़ा नाम, बड़ा काम)।
कुछ लोग बढ़िया काम करना चाहते हैं। (काम भावना से प्रेरित)कुछ लोग नई और छोटी कंपनियों को चुनते हैं (जैसे जैसे कंपनी आगे बढे आप भी आगे बढ़ें, जैसे जैसे कंपनी बड़ी हो आप भी बड़े हों)
ये जो तीसरी मंजिल है, ये थोड़ी ट्रिकी है।
रजनीश ने एक ऐसी ही छोटी सी कंपनी में नौकरी ली (छोटी लेकिन काम बढ़िया)। लोग कहते थे, और रजनीश भी सोचता था और सपने बुनता था। जैसे जैसे कंपनी बड़ी होगी वैसे वैसे बड़ी तनख्वाह, बड़ा ओहदा, बड़ा ऑफिस।
और सोच के मुताबिक़ कंपनी आगे बढ़ी, कंपनी बड़ी हुई। लेकिन क्या हुआ उस बड़ी तनख्वाह, बड़े ओहदे, बड़े ऑफिस के सपने का।
न तनख्वाह बड़ी हुई, न ओहदा बड़ा हुआ, न ऑफिस। उसकी टीम बड़ी हुई, उसके ऊपर बड़े लोग आए जिनके पास थी बड़ी तनख्वाह, जिनका था बड़ा ओहदा और ऑफिस खैर वो तो उनका भी उतना ही बड़ा था।
और रजनीश का क्या? कंपनी के बढ़ने के साथ उसका बढ़ा दुःख, बढ़ी उदासी, बढ़ी निराशा। लेकिन हाँ, कुछ घटा भी। उसकी घटी इज्ज़त।
तो आप चिंता न करें। आप भी कंपनी के साथ आगे बढ़ेंगे। लेकिन किस रास्ते पर ये सोच लीजियेगा। यही है कहानी इस कोरपोरेट वर्ल्ड की।

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