Monday, 8 March 2010

मेरी पहली कोक कैन

बोतलों में मिलती थी कोल्ड ड्रिंक पहले। वैसे ही कोको कोला बड़े डिमांड में था (विदेशी ड्रिंक)।
उस समय (करीब 13 साल पहले) कोक कोल्ड ड्रिंक का कैन ले कर आया।
पता नहीं कहाँ मिलता था वो कैन लेकिन हमने उसको सिर्फ टीवी पर देखा था। शायद दिल्ली जैसे बड़े सहरों में मिलता होगा।

इश्वर की माया। काफी दिन तपस्या करने के बाद हम बिहार के एक माध्यम वर्गीय शहर में गए। देवघर।
चाचाजी रहते हैं वहां।

पहुँचते ही बड़े भईया से पहले सवाल। 'कोक कैन मिलती है क्या यहाँ?'
'हाँ मिलती है।'

'पापा पापा मुझे कोक कैन चाहिए।'
'बोतल वाली पी लो।'
'नहीं!! कैन।'

इतनी महंगी चीज़ (30 रुपये) बड़ी जद्दो जेहेद के बाद मिल ही गयी।

वो ठंडा कैन। उसपर टपकता वो पानी। लाल कैन की वो लाली आँखों में उतर आई।
खैर कैन से कोल्ड द्रिंग तो पीई ली। और फिर कैन को सहेज से वापस घर ले आया।
उसके सर को काटा।

और उस दिन से अगले कुछ महीनों तक जब भी पानी पीता तो मेरा प्यारा कैन मेरे गिलास का काम करता।
कुछ महीन बाद उस कैन ने रूप बदला और बन गया मेरा पेन स्टैंड।

आज न जाने कितने कैन पीने के बाद भी वो मज़ा नहीं आया जो उस पहले कैन में था।

वो थी 'मेरी पहली कोक कैन'......



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