Friday, 19 March 2010

एकलव्य और अर्जुन

इस कहानी में तीन पात्र हैं।

पहले हैं गुरु द्रोण (सुपरवाइसर)।
दूसरा है अर्जुन।
और तीसरा है एकलव्य।

कुछ लोगों का मानना है कि एकलव्य अर्जुन से बेहतर धनुर्धर था। इस मान्यता को अभी के लिए ले कर आगे बढ़ते हैं। एकलव्य भी गुरु द्रोण का ही शिष्य था। उसने भी उनसे ही धनुष कला सीखी थी। फिर भी गुरुदेव को उसकी कला का पता नहीं था। कारण? वो कभी पहले खुद को गुरुदेव के सामने लाया ही नहीं। उसने कभी अपनी कला का एहसास गुरुदेव को दिलाया ही नहीं।
तो अगर आप एक बहुराष्ट्रिये कम्पनी में कार्य करते हैं तो एक बात याद रखें। चाहे आपको धनुष कला आती हो या न आती हो, आप अपनी कला और शिष्य के द्वारा कला प्राप्ति के लिए उठाये गए कष्टों का एहसास गुरु द्रोण को अवश्य दिलाएं। तभी आप अर्जुन बन पायेंगे (गुरुदेव कि नज़र में सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर)। और यदि आप धनुष कला में लगे हुए हैं अपना कर्म समझ कर (और उसका एहसास गुरुवार को नहीं दिला पा रहे हैं) तो आप कहीं एकलव्य न बन जाएँ।
आप कहेंगे इसमें क्या बुराई है। हम अपना कर्म पूरी इमानदारी से करेंगे तो गुरुदेव हमें अवश्य नोटिस करेंगे। जागिये महाशय। गुरुदेव वही नोटिस करेंगे जो उन्हें कराया जाएगा और जो वो करना चाहेंगे।

और यदि आप फिर भी जंगल में चुप कर धनुष कला का अभ्याश करना चाहते हैं और ये सोचते हैं कि सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बन जाऊँगा (अर्जुन से भी बेहतर) तो वो बाद याद रखें जो महाभारत में हुई थी। कभी कभी गुरुदेव अपने अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ बनाए रखने के लिए एकलव्य का अंगूठा भी मांग लेते हैं।

तो मित्रों, मेरे प्यारे एकलव्यों, कम से कम अपने अंगूठे को बचाने के लिए जागो और चिरियाँ कि एक आँख को देखो। अर्जुन ही सर्वाइव करता है एकलव्य नहीं।

5 comments:

  1. आज की दुनिया में जीने की कला....एकदम सटीक और प्रेरक!!

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  2. "एक बात और यह कि अगर हम अपने कष्टों के बारे में गुरूवर को नहीं बताएँगे तो वे हम पर ही चोरी से सीखने का इल्जाम लगा देंगे......बहुत बढ़िया व्यंग......"

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  3. जी बिल्कुल इल्ज़ाम लगाएँगे और आपका अंगूठा भी माँग लेंगे। सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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  4. बहुत सही राजनीती के बारें में कहा जाता है " करना सब चाहते हैं ,बहुत कम कर पाते हैं ,नहीं करोगे तो दासता ,करोगे तो सत्ता "
    करना मजबूरी है ,नहीं तो उखाड़ फैंके जाओगे ,यही सत्य है, अपना कर्म उत्तम रखो लेकिन साबधान भी रहो
    -गगन

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