Sunday, 18 April 2010

खूब लड़ी मर्दानी वो तो स्कूटी वाली रानी थी

आज कल सुबह सुबह भी काफी गर्मी हो जाती है। 9 बजे सुबह भी ऑफिस जाना भी मुश्किल हो जाता है।
खैर, आँखों में सपने लिए घर से हम चल तो दिए........

धूल भरी सड़क (गुडगाँव की हर सड़क ऐसी ही होती है)। चिलचिलाती धुप।
मैं अपनी 'पक्की मर्द' बाइक पर चला जा रहा था। रिअर व्यृ मिरर पर नज़र गई अचानक।
पीछे से फर्राटे से आती हुई एक स्कूटी दिखी।
मैं मन ही मन हंसा...... ये पिद्दी गाड़ी इतनी तेज़ चल रही है। हेलीकाप्टर समझ रही है खुद को क्या?

मिरर से नज़र हटाई और अपनी धुन में आगे बढ़ गया।
कान में ज़ूउउउउउउउउउउउउउम की आवाज़ आई अचानक और बगल से निकली एक स्कूटी।
उसपर बैठ सवार ने हेलमेट पहन रखा था काला। चेहरा पीली चुनरी से ढाका हुआ था। जैसे ही मुझसे आगे बढ़ी स्कूटी उसके हेलमेट से पीछे उसकी चुनरी उड़ रही थी, सुपरमैन के कपड़े की तरह।

आपको बता दूँ मै उस समय 60 से ऊपर की गति पर चल रहा था। जैसे ही उस स्कूटी और उसके सवार ने मुझे ओवरटेक किया, मन से आवाज़ निकली......... जय हो झाँसी की रानी की।

जी बिल्कुल, उस हवा से बातें करती वीरांगना को देख के लगा जैसे झाँसी की रानी अपने घोड़े पर सवार हो कर युद्ध पर जा रही हो।

खैर, मैं कौन सा हार मानने वाला था। मेरे पास भी थी मेरी 'पक्की मर्द' बाइक। मैंने एक्सिलेटर को थोड़ा झटका दिया।
ट्राफिक धीमा हो गया था। रानी साहिबा भी धीमी हो गयी थी।
यही था मेरा मौका। और मैंने मारा चौका। चुपके से उनके बगल से निकाल कर आगे बढ़ गया।
मुहाहाहाहाहाहा, मैं आगे वो पीछे। बड़ी आई थी हेलीकाप्टर चलाने वाली।

1 मिनट बाद।
जूउउउउउउउउउउउउउम की आवाज़ आई। और मैं देखता ही रह गया।
घोड़े पर सवार रानी लक्षमी बाई फर्राटे से आगे निकाल गयी।
मैं और मेरा 'पक्का मर्द' देखते ही रह गए।
पीछे रानी साहिबा की चुनरी लहरा रही थी। जैसे कह रही हो, "जा अपने माँ के अंचल में छुप जा'।

आधे मिनट बाद दूर वो और उनका घोड़ा दूर सिर्फ एक बिंदी मात्र दिख रहा था।

अगर कहीं मिलती वो तो बस उनसे कहना चाहता था
भारतिय नारी तुझे सलाम ...........

15 comments:

  1. मेरा भी सलाम

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  2. हा हा एक मज़ेदार वाक़िया ज़ोरदार व्यंग्य के साथ। क्या कहना।

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  3. हा हा
    मज़ेदार वाक्या

    हम भी ऐसी स्थितियों से कई बार गुजरे हैं

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  4. जूउउउउउउउउउउउउउउम ....हा हा हा ..मजेदार रहा सांउंड इफ़्फ़ेक्ट से साथ और अभी मजा आया ..

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  5. ऐसी ही रानी लक्ष्मी बाई हरेक शहर में मिल जायेंगी चलो एक तो आपके शहर में है ही..

    प्रस्तुति का अंदाज निराला है खासकर

    'पक्की मर्द' बइक
    पिद्दी गाड़ी
    हेलीकाप्टर समझ रही है खुद को क्या?
    रानी साहिबा
    भारतिय नारी तुझे सलाम ..

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  6. Ankit sir, what should I say, Even I ride my scooty at 70 km/hr speed:)
    N its pretty fun also to overtake guys:D
    By the way nice blog, n nice writing, enjoyed:)

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  7. bahut khub


    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  8. aapki abhivikyati kisi bhi vyang se aage jaa chuki hai.

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  9. अब तो ऐसी ही झांसी की रानी हर क्षेत्र में झू करके आगे निकलेंगी। हा हा हा हा।

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  10. आज कल सच मैं हर क्षेत्र मै रानी की झाँसी से मुलाक़ात होती है

    कलाकार की कला की सराहना ही उसके लिए ईंधन है। सराहना के लिए आपसबका बहुत बहुत धन्यवाद।

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  11. उसे मेरा भी सलाम। परन्तु वह और आप दोनों ही अपनी गति अपनी सुविधा व सुरक्षा के अनुसार रखें तो बेहतर रहेगा। यह आगे निकलने की धुन खतरनाक होती है।
    घुघूती बासूती

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  12. भीङु बात बात मैं गोल कर गये....वो थी कौन बताओं तो सही

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  13. अतिसुन्दर///
    क्या बात है...
    किस अंदाज़ में सलाम किया आपने...
    यह सलाम आपका है या आपकी 'पक्की मर्द' बाइक ने आपके कान में फुसफुसाया यह सलाम...
    मैं तो यही सोच रहा हूँ...

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  14. बासूती जी, मैं बेचारा उस लक्ष्मी बाई के सामने कहाँ तेज़ चला पाउँगा.
    मिहिरभोज बाबु, अगर पता होता की कौन है तो कब का 'पक्के मर्द' को छोड़ के उसकी स्कूटी पर जा बैठता.
    नीरज जी, किसी ने किसी के कान मैं नहीं फुसफुसाया. हम दोनों अपने अहम् की चोट पर चिल्लाए थे.

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