Saturday, 15 May 2010

कुत्ता किसको बोला बे?

अभी कुछ दिन पहले एक बड़ी पार्टी के एक नेता ने कुछ दूसरी पार्टी के नेताओं को कुत्ता कह दिया।
इस बात पर बहुत बवाल हुआ। इसे अभद्रता का प्रदर्शन माना गया। कई नेताओं ने इस बात पर काफी दुख भी ज़ाहिर किया।

बात दरअसल बहुत दुख की है। किसी आदमी को कुत्ता कह दिया। वो भी बड़े इज़्ज़तदार नेता को। बड़े दुख की बात है।

क्या उनकी कोई इज्ज़त नहीं है? क्या उन्हें दुख नहीं होता? बेचारे कुछ कहते नहीं हैं तो आप उन्हें कुछ भी कह देंगे?
जी हाँ मैं उन्ही की बात कर रहा हूँ।
कुत्तों को।
बेचारों को नेता से कंपेयर कर दिया।
क्या कहा आपने? फर्क क्या है?

बेचारा कुत्ता इतना ईमानदार। आज तक किसी ईमानदार नेता के बारे में सुना है आपने? न तो देश के लिए ईमानदारी, न तो पार्टी के लिए ईमानदारी और न ही जनता के लिए। तो कैसे हुए कुत्ते और नेता एक जैसे।

कुत्ता जिस घर में रहता है उसकी रक्षा करता है। सुना है आपने की कोई नेता देश की रक्षा करता है। नेता देश की रक्षा नहीं भक्षा करता है। पता नहीं कैसे कुत्ते हो गए वो?

कुत्ते के मालिक पर अगर कोई ख़तरा हो तो वो उसे काटने दौड़ता हैं। नेता अपने मालिक (जनता) को काटने दौड़ता है। कैसे कहते हैं आप नेता को कुत्ता?

गजब करते हैं आप लोग। बेचारे कुत्ते की इज्ज़त का कोई ख़याल ही नहीं है। किसी कुत्ते ने इन बातों को सुन लिया (खुदा न खासते) तो उस पर क्या बीतेगी?

और नेताजी का भी गुस्सा करना लाज़मी है। अगर नेता का व्यक्तित्व कुत्ते जैसा हो गया तो उसे कौन सी पार्टी लेगी, कैसे बनेगा वो बड़ा नेता। ये लक्षण उसके लिए प्रतिकूल हैं।

कृपया इस प्रकार के प्रतिकूल प्रचार से बचें। नेता और कुत्ता दोनों।

No comments:

Post a Comment