Saturday, 17 July 2010

जातिवाद: रेसिस्म

आज कल दुनियां में कई जगहों पर हिन्दुस्तानियों को जातिवाद (रेसिस्म) का निशाना बनाया जा रहा है। चाहे वो इंग्लैंड हो या अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया। हर जगह कुछ न कुछ दिक्कत हो रही है।
शायद ये सब नया नहीं है। शायद ये सब पहले भी होता था। शायद फर्क बस इतना है की पहले हमें इनके बारे में पता नहीं चल पाता था। आज कल टीवी, रेडियो, इन्टरनेट जैसी चीज़ों ने हमें इन घटनाओं से अवगत करवाया है।
आज जैसे ही ऑस्ट्रेलिया में किसी हिन्दुस्तानी पर हमला होता है, हमें खबर मिल जाती है और हम सब खुल कर उसकी भात्सना करते हैं। जैसे ही अमेरिका में या इंग्लैंड में कोई हिन्दुस्तानियों के बारे में बुरी बातें फैलाता है, हम सब तक बात पहुँच जाती है और हम उसकी काफी निंदा करते हैं और विरोध प्रदर्शन करते हैं।
हम सबको अपने देश से बहुत प्यार है और ऐसे समय पर हमारी देशभक्ति काफी जोर से उफान भी मारती है। किसी ने हमारे बारे में गलत कैसे कह दिया? काफी दिन सह लिया हमने चुप चाप। लेकिन अब हमारे पास शक्ति है, टीवी की, रेडियो की, इन्टरनेट की। अब हम खुल कर अपने विरोध से अवगत करवा सकते हैं लोगों को। और करवाते हैं।

खैर। इन सब के बीच में में बड़े असमंजस में हूँ। इस जातिवाद का आखिर इतना विरोध क्यों कर रहे हैं हम? क्या ये कोई नयी बात है हमारे लिए?
हमारे देश में इतनी विविधता है। इतनी जातियां हैं। इतने धर्म हैं। इतने प्रदेश हैं। इतना ही नहीं, हमारे इस छोटे से राष्ट्र में एक बड़ा सा महाराष्ट्र भी है। खैर मैं पूछना ये चाहता हूँ की हम हिन्दुस्तानियों के खिलाफ दुसरे देशों में होने वाले जातिवाद का इतना विरोध कर रहे हैं आज कल, हमारे dil को इन चीज़ों से इतनी ठेंस पहुँच रही है आज कल, पर क्या हिन्दुस्तानियों से बड़ा जातिवाद कोई है क्या इस दुनिया में?

हमारा वर्ण (जाती) विभाजन इतना मज़बूत है की आज भी चला आ रहा है (हज़ारों साल से)। आज भी कथित ऊँची जाति के लो कथित नीची जाति के लोगों को अपने से छोटा समझते हैं। कई जगह इन कथित जातियों के बीच काफी घृणा की भावना है और अक्सर ये घृणा उग्रता के रूप में भी निकलती है।
हिंदुस्तान ने हमेशा हर धर्म के साधकों को अपने यहाँ जगह दी है। ये हमारे लिए एक आम बात है। पर इतना ही आम है हमारे लिए, इन विविध धर्मों के बीच उग्रता देखना। हिन्दू- मुस्लिम दंगों का मामला अक्सर होता है इस देश में।
में दिल्ली में काफी साल से रह रहा हूँ। एक बार मैं एक बस मैं कॉलेज से लौट रहा था। सामने की सीट पर बैठ कंडक्टर अपने चेले से कह रहा था," भैया तो तीन तरह के ही होते हैं। एक सब्जी वाला भैया, एक दूध वाला भैया, और एक बिहारी और यु पी वाला भैया। क्या ये रेसिस्म है? खैर वो तो अनपढ़ था, मैं बुरा नहीं मानता उसकी बात का।
हमारे देश में चुटकुले काफी प्रचलित हैं। और सबसे ज्यादा प्रचलित हैं चुटकुले सरदारों के बारे में, सिख समुदाय के बारे में। काफी मज़ा आता है संता बंता की कहानियाँ सुनने में। पर क्या हमने सोचा है की सिखों को कैसा लगता है ये चुटकुले सुन कर? क्या ये रेसिस्म है? खैर ये हो मज़ाक में किया जाता है। इनका क्या बुरा मानना? मैं बुरा नहीं मानता इन बातों का।
दिल्ली जब आया था पहली बार तो मेरे भैया एक दिन बता रहे थे की 'चिंकी' बच्चे बड़े ही प्यारे लगते हैं। फिर उन्होंने मुझसे कहा, तुम तो नहीं जानते होगे चिंकी क्या होता है। मैं बिहार से नया नया आया हुआ क्या जानता? उन्होंने कहा," कोई बात नहीं, अगले हफ्ते से कॉलेज जा रहे हो, सीख जाओगे।" जी जनाब, पहले दिन ही सीख गया। हिन्दुस्तान से उत्तर पूर्व से आने वाले लोगों को दिल्ली में चिंकी कहते हैं। क्या ये रेसिस्म है? अरे नहीं वो तो बातों बातों में कहते हैं। इसका क्या बुरा मानना? मैं बुरा नहीं मानता इन बातों का।
बम्बई (माफ़ कीजियेगा, मुंबई) में पिछले कुछ दिनों में बिहार और यू पी से आये लोगों का काफी विरोध किया गया और कई बार हिंसा का भी इस्तेमाल किया गया। क्या ये रेसिस्म नहीं है? लेकिन आपको समझना चाहिए ऐसा क्यों हो रहा था। ये लोगों की नौकरियों और उनकी जिंदगी का मुआमला था। ये लो मराठियों की नौकरियां ले रहे थे। इसका क्या बुरा मानना? मैं बुरा नहीं मानता इन बातों का।

अरे लेकिन यही सब तो हो रहा है हिन्दुस्तानियों के साथ। अमेरिका में हिन्दुस्तानियों को 'पाकी' कह के बुलाते हैं। ये काफी कुछ 'चिंकी' जैसा है। हमारी आदतों और सभ्यता पर काफी चुटकुले भी बनते हैं पश्चिमी देशों में। ये काफी कुछ संता-बंता जैसा लगता है मुझे। पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया में हिन्दुस्तानियों पर काफी हमले हुए। सुना वहां के लोगों की नौकरियां ले रहे थे हिन्दुस्तानी। मुंबई की याद सी आ गयी।

ऐसी और भी हज़ारों चीज़ें होती हैं हमारे देश में, जिनका विरोध हम खुल कर नहीं करते। ये आम जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन दुसरे देशों में जैसे ही कोई बात होती है, हमारा खून खौल जाता है।
मुझे कभी कभी लगता है की हमारी देशभक्ति सिर्फ तीन मौकों पर सामने आती है:
१ हिंदुस्तान पाकिस्तान युद्ध
२ क्रिकेट मैच
३ दुसरे देशों में हमारे खिलाफ जातिवाद

बाकि सब ठीक है। बाकि सब चलता है। क्या है कोई हिन्दुस्तानियों से बड़ा जातिवाद?

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