Thursday, 8 September 2011

बम ही क्यों, और भी तरीके हैं भाई

कल दिल्ली में एक और बम फटा। अब तक 12 लोग मारे जा चुके हैं और 50-60 घायल। हिन्दू, मुसलमान, सिख सभी।

आप कहेंगे कोई नयी बात बताइये साहब, ये तो हर रोज़ हो रहा है। अब अखबार में और टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ आना चाहिए: 'आज हिंदुस्तान में कहीं बम नहीं फटा', 'कहीं कोई आतंकवादी हमला नहीं हुआ'। कुछ नेता कहते हैं ये १% का मामला है। सरकार ज़रा नींद से जागिये, ये मामला अब १००% का बनता जा रहा है। मन कि देश कि जनसँख्या बहुत ज्यादा है और बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। पर ये कोई तरीका थोड़े है रोकथाम का, और भी तरीके हैं भाई। एक वक्त था जब एक नेता जी लोगों को पकड़ पकड़ के नसबंदी करवा देते थेपर जान बच जाती थी। आज दूसरे नेतालोग आतंकियों को खुला छोड़ दे रहे हैं। जाओ भाई ख़तम करो लोगों को। उन नेताओं के लिए एक सन्देश है मेरा: सरकार, मेरा न विवाह हुआ है, न बच्चे हैं। परन्तु में नसबंदी करवाने को तैयार हूँ। बस जान बक्श दो मेरी।

में दिल्ली के ही पास एक शहर रुपी 'गाँव' में रहता हूँ और आफिस भी यहीं है। मेरे दोस्त लोग कभी मिलने नहीं आना चाहते। कहते हैं यार ये कौन सी दुनिया में रहते हो। पहुचना भी गंगा नहाने के बराबर है। आज में उनपे हँसता हूँ। अरे मूर्खों, ये ऐसी जगह है कि आम आदमी न आ पाए, आतंकवादी और उनके बम किस खेत कि मूली हैं। कम से कम सेफ हूँ भाई।

बचना है तो इन नेताओं पर से भरोसा छोड़िये और मेरी तरह इस सेफ 'गाँव' में आके रहिये। वैसे भी, बम ही क्यों, और भी तरीके हैं भाई हर किसी के लिए।

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