Saturday, 31 December 2011

सावधान: आपका फेसबुक प्रोफ़ाइल आपसे भेद भाव का कारण बन सकता है

चेतावनी: इस लेख में फेसबुकिया भाषा का प्रयोग हो सकता है। अगर समझने में कठनाई हो तो कृपया लेखक से संपर्क करें

जी, हैरान न हों...... आज कल सब कुछ फेसबुक पर होता है। प्यार, तकरार, संवाद, विवाद, निकाह, तलाक........ सब फेसबुक पर। अजीब सी दुनिया है ये, किसी ने दुख भरा संवाद भी लिखा तो लोग उसे 'पसंद' (लाइक) कर देते हैं। अरे भी दुख को पसंद करने की क्या बात है? लेकिन हाँ फेसबुक वालों ने 'नालायक' (डिस लाइक) का बटन बनाया ही नहीं, हैरानी की बात है।

खैर, जब सब कुछ फेसबुक पर हो रहा है तो भेद भाव क्यों नहीं? किस्सा कुछ दिन पहले का है। हमारे एक मित्र (फ्रेंड) ने अपने फेसबुक पर 'दशा नवीकरण' (स्टेटस अपडेट) किया। भारत के हर एक नागरिक की हरह, उनके अपडेट भी आज कल सिर्फ भ्रस्टाचार, अन्न हज़ारे और काँग्रेस के बारे में रहे हैं। ये भी कुछ इसी विषय पर था। मस्तिस्क टटोलने पर याद आता है की शायद उन्होने अन्न जी के तरीकों की कुछ भत्सना की थी।
खैर उनके इस अपडेट पर हमारे एक अन्य मित्र ने 'टिपन्नी' (कमेंट) किया अपना विरोध प्रदर्शिस्त करने के लिए।
तत्पश्चात, हुमारे पहले 'मित्र के एक मित्र' (फ्रेंड ऑफ फ्रेंड) ने हमारे दूसरे मित्र को संबोधित करते हुए 'टिप्पणी' की......

"मैंने सोचा शायद आप इस विषय के बारे में ज्ञान रखते हैं इसलिए टिप्पणी कर रहे हैं। परंतु आपका फेसबुक 'वर्णन' (प्रोफाइल) देखने से पता चलता है आपको आपको कॉमिक्स पसंद हैं और कुमार शानू अच्छे लगते हैं। कहने का तात्पर्य ये है कि आपकी प्रोफाइल कि किसी चीज़ से ये नहीं पता चलता है कि आप जिस विषय पर चर्चा कर रहे उसका आपका ज्ञान है।"

अब मेरा सवाल ये है कि ये मेरे दोस्त के दोस्त (फ्रेंड ऑफ़ फ्रेंड) कैसे परख रहे हैं मेरे मित्र को उसके प्रोफाइल के माध्यम से? अगर उसने अपने प्रोफाइल में बड़ी बड़ी बातें नहीं लिखीं हैं तो क्या उसे इस विषय पर विचार रखने का हक़ नहीं है? क्या हर विषय, जिसपर आप अपने विचार प्रकट करें, उसे अपने फेसबुक प्रोफ़ाइल में लिखना ज़रूरी है? और हाँ, क्या कॉमिक्स और कुमार शानू को पसंद करने वाला व्यक्ति गंभीर मुद्दों का ज्ञान नहीं रख सकता, उनपर विचार नहीं कर सकता, उनपर अपना मत नहीं रख सकता? कुमार शानू एक बड़े उत्तम किस्म के गायक हैं और कई बार उन्होने फिल्मफेर पुरस्कार भी जीता है। और हाँ, मुझे याद है कि मेरी कक्षा के सारे उत्तम विद्यार्थी कॉमिक्स के दीवाने हुआ करते थे, कई अभी भी हैं।
कैसा भेद भाव है ये भाई?

इस प्रकार के निजी प्रहार और भेदभाव का क्या लाभ? कम से कम फेसबुक जैसी पाक जगह पर तो ये सब न हो।
खैर, आपके लिए हिदायत ये है कि आप अपने प्रोफ़ाइल को सम्पूर्ण रखें और ध्यान रखें कहीं कोई ऐसा भेदभाव आपके साथ न करे.........

नव वर्ष कि सुभकामनाएं......

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