Wednesday, 28 November 2012

रीस्टार्ट

एक ज़माना था जब मैं हिंदुस्तान के कई हिस्सों का भ्रमण किया करता था, वो भी फ्री मैं, कंपनी के पैसों पर। लोग मुझे कहते, अरे ये घूमना भी कोई घूमना है लल्लू, हाँsss!!! ऐसा इसलिए कि मैं गावों के चक्कर लगाया करता था, अक्रॉस इंडिया, ओह सॉरी भारत। जी मैं भारत या हिंदुस्तान घूमा, इंडिया नहीं। असली भारत गावों में बसता है, ऐसा लोग कहते हैं। गाँव जाके मुझे भी ऐसा ही लगा। क्या लोग, क्या बातें, क्या किस्से, क्या कहानिया? ये बात शहर में कहाँ। हाँ शहर में है मॉल, सिनेमा, बिजली जिनके बिना मैं भी नहीं रह सकता। लेकिन कभी कभी गावों का चक्कर लगाते रहने से अपने हिन्दुस्तानी होने का गर्व बढ़ा और खुद को अंतर मन से हिंदुस्तान से जोड़े रखने में मदद मिली।

कुछ साल पहले, इन्हीं गावों में, इन्हीं लोगों के बीच, इन्हीं बातों इन्हीं बाद, इन्हीं किस्सों और कहानियों के बीच मुझे याद आई हिंदी की। याद आये कॉलेज के वो दिन जब हम हिंदी ठीक से न बोल पाने वालों पर हँसते थे। साफ़ कर दूँ कि ये हंसी  उन पर नहीं थी जिनकी मातृ भाषा हिन्दी नहीं थी। ये उनके लिए रिजर्व थी जिनकी मातृ भाषा हिन्दी थी पर वे ठीक से हिन्दी बोल नहीं पाते थे और हमपर अंग्रेज़ी का धौंस जमाते थे। इसी याद के सहारे मैंने ये ब्लॉग लिखना शुरू किया। परंतु कुछ समय पहले जीवन कि धाराओं में बहता हुआ इस ब्लॉग से कुछ दूर हो गया। किस्से अब भी हैं, बाते अब भी हैं परंतु न जाने क्यों लिख न पाया। अक्सर इस ब्लॉग को देखता था और सोचता था, कुछ लिखूँगा परंतु अगले दिन सब भूल भाल कर फिर आगे बढ़ जाता था।

परंतु अचानक वो ईक्षा फिर अंतर मन पहले हिलोरे मार रही है। कल एक हिन्दी चैनल के एंकर रविश कुमार का इंटरव्यू देखा समाचारों के धोबी घाट पर। इंटरव्यू कि शुरुआत ही हुई कहते हुए कि पहले अंग्रेजी बोलने वाले हिंदी वालों पर हँसते थे और अब हिंदी वाले अंग्रेजी बोलने वालों पर हँसते हैं। रविश जी, उनकी हिंदी और उनके अंदाज़ का मैं पहले से ही प्रसंशक हूँ, पर आज उनके इस इंटरव्यू में उनका साक्षात्कार करने वाले (अंग्रेज़ी के महारथी) के मुंह से यह बात सुनकर वो पुरानी कसक फिर जाग उठी। वो विचार फिर हिलोरे लेने लगे। और मैंने फैसला किया की इस ब्लॉग को रीस्टार्ट करूँ। कंप्यूटर की तरह मस्तिष्क ने भी कही विकल्प दिए। शटडाउन, स्लीप, हाइबरनेट और रीस्टार्ट। काफी विचार के बाद रीस्टार्ट दबाया। दिमाग ने दुबारा पूछा यदि मेरे इस फैसले को लॉक कर दिया जाए। फिर विचार, फिर हाँ। तो वापसी का ये पोस्ट मैंने लिख डाला।

आशा करता हूँ इस बार ये काफिला चलता रहे। 

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