Sunday, 23 December 2012

आज थोड़ा गर्व है देश पर....


सुना आज भारत के एक महानायक ने हथियार डाल दिए। अब कुछ बड़े युद्धों में ही लड़ेंगे। छोटे युद्धों में बहुत लड़ लिए। अब उम्र हो चली है। शेर बूढ़ा हो चला है। प्रकृति का नियम है, हमारी भी बारी आएगी। 

खैर, उन्होंने तो हथियार डाल दिए। वो बूढ़े हो चले हैं। पर हमारी नवयुवतियाँ और हमारे नौजवान हथियार नहीं डाल रहे हैं। उन्हें इन्साफ चाहिए। इन्साफ उस लड़की के लिए, जिसके साथ जघन्य अपराध हुआ था कुछ दिनों पहले। इस बर्बरता के साथ हुए अपराध के लिए इन्साफ चाहिए। 

यदि कोई साधारण दिन होता तो शायद सारे मीडिया, पारंपरिक और सोशल, पर महानायक, उनके हथियार डालने और उनके महायुद्धों की ही बात छाई रहती। पर ये समय साधारण नहीं है। यह असाधारण वक्त, एक असाधारण कांड का परिणाम है और इस आसाधारण वक्त में असाधारण कार्य हो रहे हैं। सुनता हूँ हिंदुस्तान का युवा जाग गया है और नेता सो नहीं पा रहे हैं। 

इस बात के लिए आज थोड़ा गर्व है देश पर। महानायक साइड और असल नाइकाएँ और नायक मेन फ्रेम में। कारण, कुछ खलनायकों को सज़ा दिलवाना है। गर्व है थोडा आज देश पर। 

पर गर्व थोड़ा ही है। 

इसका कारण है, थोड़ी नासमझी लोगों की। हम नवयुवतियों और नौजवानों की नासमझी। हो-हल्ला, हंगामा। कुछ लोग कल रात 'विदेशी राजमाता' से मिले। उनसे जल्द से जल्द सक्त कारवाई कि माँग की, कारवाई माने फांसी। राजमाता ने जल्द कारवाई कि कोशिश का आश्वाशन दिया। लोग निश्चित समय बताने कि माँग कर रहे थे। राजमाता की 'कोशिश' के आश्वासन से संतोष नहीं हुआ उनको। शायद उनको पता नहीं है कि अपराधियों कि किस्मत का फैसला कोर्ट के हाँथ है, सरकार या राजमाता के नहीं। क्या सज़ा और कितने समय में सज़ा, ये भी न्यायालय के ही हाँथ है, राजमाता या सरकार के नहीं। हाँ सरकार और राजमाता पुख्ता छानबीन और ठोस केस का आश्वाशन दे सकते हैं और सिर्फ आश्वासन ही नहीं, इस बात को पक्का भी करना चाहिए उनको। लेकिन फैसला वो नहीं कर सकते हैं और उनको हक़ होना चाहिए फैसला करने का। अगर ऐसा हक़ मिल गया तब तो राजमाता अपने सारे बलात्कारी सांसदों (ओह सॉरी, मेरा मतलब है जिनपर रेप का केस है) को तुरंत बरी (अंग्रेजी वाला नहीं) करवा देंगी। 

आज कुछ नवयुवतियाँ और नौजवान फिर राजमाता से मिले। साथ में 'राजकुमार' भी थे। उन्होंने भी करवाई में सरकार की तरफ से कोई कसर छोड़ने का आश्वाशन दिया। पर निश्चित समय वो भी दे सके। न्यायालय तो हैं नहीं वो। इस बात को लोगों को, ख़ास कर हमारी नवयुवतियों और नौजवानों को समझना चाहिए कि हमारे यहाँ सिर्फ न्यायालय ही सज़ा दे सकता है। और न्यायालय को कोई बरगला नहीं सकता है और बरगलाने की कोशिश करनी चाहिए। 

प्रजातंत्र के तीन पायों को याद रखिये और कृपया समझिए कि लेजिस्लेचर (माने हमारे सांसद), एग्जीक्यूटिव (माने पुलिस) और जुडिसियरी (माने न्यायालय) के काम अलग अलग हैं और तीनों में से किसी को एक दुसरे के रास्ते में नहीं आना चाहिए। इससे प्रजातंत्र कमज़ोर होगा। 

विरोध प्रदर्शन, हो हल्ला करने से पहले ये बातें समझना ज़रूरी है ताकि हम सही माँग सही लोगों के सामने उठाएं। 
जन जागरण पर गर्व है पर इस समझ कि थोड़ी कमी लग रही है। ये समझ कर आगे बढ़ें तो और भी गर्व होगा अपने देश पर। इसलिए शायद, आज गर्व है देश पर कि महानायक को साइड रखा और असली नाईकाओं और नायकों को मेन फ्रेम में रखा। पर गर्व पूरा नहीं है। 

इसलिए कहा, आज थोड़ा गर्व है देश पर........

5 comments:

  1. ...तो हमें कौन सा पूरा है ?

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  2. राजा गए रजवाड़े गए ...लेकिन राजा, राजमाता और राजकुमार अभी तक बने हैं प्रजातंत्र शायद इसी का नाम है ....बहुत बढ़िया चिंतन ....

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    1. कविता जी हमारे नेता हमेशा राजधर्म और राजतंत्र कि बात करते हैं। वो अब भी राजा मोड में ही हैं। और शायद हम भी।

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  3. मित्र आपकी बात एकदम सही है। पर दो बाते हैं..एक ये कि जो लोग सोनिया गांधी जी से मिलने गए थे उनके बारे में दिन में ही खबर दे दी गई थी कि वो कांग्रेस की कालेज ईकाइ NSUI के लोग हैं.....
    2-कोई प्रदर्शनकारी किसी पार्टी या किसी खास के नेतृत्व में नहीं पहुंचा है इंडिया गेट पर सो कोई प्रतिनिधि मंडल न होने की वजह से सरकार भी किसी से बातचीत नहीं कर पा रही है।
    3-लोग दरअसल में दुखी हैं और चाहते हैं कि दिल्ली में पुलिस की गश्त बढ़े औऱ इसका आश्वासन अब तक किसी ने नहीिं दिया है है. सिर्फ बातें हो रही हैं..लेकिन सड़क पर असर कम है।
    4-इस प्रदर्शन से कम से कम इस मामले में चार्जशीट इसी हफ्ते दाखिल होने की उम्मीद है।
    5-हंगाम इसिलए यहां बरपा है क्योंकि जब राजधानी सुरक्षित नही तो देश के बाकी इलाकों का हाल कैसा होगा सोचने की जरुरत नहीं है। इसी पर मेरी पोस्ट थी।


    एक बात आपकी पिछली पोस्ट के बारे में ....उम्रकैद का मतलब 14 साल नहीं होता। इसका मतलब होता है कि जब तक सांस है यानि आखरि सांस तक की कैद....1990 से आज तक कम से कम 4-5 बार सुप्रीम कोर्ट इस बात को स्पष्ट कर चुका है कि उम्रकैद का मतलब जब तक कैी जिंदा है उसे जेल में रखा जाएगा....औऱ 14 साल का मतलब है कि 14 साल से पहले उशकी रिहाई पर भी विचार नहीं किया जाएगा।

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    1. रोहिताश जी जानकारी के लिए अत्यंत धन्यवाद। ये सही है कि इस आन्दोलन का कोई नेता नहीं है। ये सही में ख़ुशी और गर्व की बात है की जनता इतनी जागृत हो गई है। पुलिस के सही में गशत बढ़नी होगी और मुस्तैद होना पड़ेगा। जब तक समाज नहीं बदलता तब तक एक्स्ट्रा सुरक्षा आवश्यक है। और हाँ नेताओं को अपनी चालाकियाँ बंद करनी होंगी (जैसे एन एस यू आई वालों को बुलाना), जनता उनके झांसों के पार उनकी नीयत देख पा रही है।

      उम्र कैद की सज़ा कि जानकारी मेरी अधूरी थी। पूरा करने के लिए बहुत शुक्रिया। आज ही इसे बंकि पाठकों तक भी पहुचाने की कोशिश करूँगा। वैसे मुझे लगता है कि इन अपराधियों को उम्र कैद मिलनी चाहिए बिना किसी रियायत के। मतलब उम्र भर दयनीय हालत में कैद। फंसी बड़ी आसान सज़ा होगी इनके लिए।

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