Wednesday, 31 December 2014

As the year ends - take down the Gods

As the year ends three things stay imprinted on my mind, the three things that Indians debate the most, the four things that every Indian is an expert of - politics, films and cricket. We debate these three 'issues' like no other. We all have a view on these and we all know that 'we' understand these like no other. So, we will debate these with you all day and not agree to anything you say because obviously we understand them better.

These three things come to my mind due to two films that I saw recently - pk and Mary Kom.

pk because the film, as I write this raising lot of emotions in India. The film looks at the developing phenomenon of 'God Men' and women in India and critiques this growing 'business of religion' in which innocent people are often misguided and misled and in many cases loose their life long savings and in some cases life too. All this while the 'God Men/Women' accumulate assets - material and social and more importantly political power. This is an issue with which many people (including myself) agree. However, the film is now facing widespread protest and calls for bans in India. From what I have read, this is not because people have objections to the theme of the film - 'business of religion'. Academically speaking, no one seems to have a problem with the theory. The problem is with the empirical evidence, the case study so to speak.

preparing to worship the Gods

Thursday, 25 December 2014

लंदन २०१३: London 2013

सितम्बर में एगो पोस्ट लिखे थे इस साल के लंदन दौरा के बारे में, अ कहे थे कि पिछले साल का फोटो दिखाएँगे अगला पोस्ट में। ता उ अगला पोस्ट का टाइम आ गया है। २०१३ में भी लंदन उहे कॉन्फ्रेंस के लिए गए थे जिसके लिए इ साल गए। उ बार भी कांफ्रेंस के बाद शनिवार अ रविवार को लंदन घूमे थे। लंदन में जो असल चीज़ सब सैलानी लोग देखता है, उ सब उसी बार देखे थे। मने अंग्रज़ी संसद, बिग बेन, वेस्टमिनिस्टर केथेड्रल, थेम्स नदी, लंदन ऑय, ट्रफाल्गर स्कवायर, टावर ऑफ़ लंदन, टावर ब्रिज, और बकिंघम पैलेस - रानी का घर। इस साल के जैसा पिछले साल भी सब जगह पैदल पैदल घूमे अ पैसा भी बचाए। लेकिन नया जगह घूमने का मजा पैदल है। टाइम खूब मिलता है अ जहाँ जितना टाइम लगाना हो, अपना मन है। 
फोटो सब नीचे है। देखिये। 

जमैका एम्बेसी के सामने समलैंगिक लोग का धरना नया क़ानून बनाने के लिए  

Sunday, 14 December 2014

बार्टर बुक्स / Barter Books

दरहम के पास ही, करीब ४० मिनट रेलगाड़ी से, नॉर्थम्ब्रिया में एनैक नामक जगह है।  यहाँ एक मशहूर अंग्रेजी किला है जिसमें हैरी पॉटर की काफी शूटिंग हुई थी। हर वर्ष ढेरों सैलानी आते हैं यहाँ किले को देखने। सैलानियों को लुभाने के लिए वहाँ नकली पॉटर और हैग्रिड भी मौजूद रहते हैं अपने झाड़ूओं के साथ। सुना है काफी रमणीक स्थल है।  मैं कभी गया नहीं हूँ वहाँ। 

वैसे एनैक में एक और मशहूर जगह है। किले के मुकाबले की तो नहीं लेकिन काफ़ी लोगों के लिए किले से भी अच्छी जगह है बार्टर बुक्स। ये किताब की दूकान कुछ २४ साल पुरानी है। १९९१ में एक दंपत्ती ने पुराने एनैक रेलवे स्टेशन में इस दुकान को खोल। पुरानी किताबों की दूकान के लिए पुराने रेलवे स्टेशन से बेहतर और क्या सेटिंग हो सकती है। धीरे धीरे दुकान बड़ी हुई, और अब वहाँ जलपान का भी इंतज़ाम है। बढ़िया सूप, बर्गर इत्यादि का लुत्फ़ आप फायरप्लेस में चटकती लकड़ियों की गर्माहट में बैठ कर ले सकते हैं। दूकान के मेन एरिया में भी कई फायर प्लेस हैं। आप कोई भी किताब लेकिन इनमें से एक फायर प्लेस की सामने घंटों पढ़ सकते हैं। यहाँ काफी पुरानी किताबें दिख जाती हैं जिनमें से कई बहुमूल्य एंटीक हैं। दुकान मालिकों ने कुछ पुरानी मॉडल ट्रेनों को भी दुरुस्त कर के दुकान में चलना शुरू कर दिया है। पुरानी किताबों से भरी अलमारियों पर दौड़ती ये रेलगाडियां एक अद्भुद अनुभव प्रस्तुत करती हैं। ये दुकान एक ऐसी जगह है जहाँ बिना कुछ खरीदे भी आप घंटों व्यतीत कर सकते हैं। एक बार जाना तो बनता है। 

जलपानगृह से दुकान का दृश्य 

Tuesday, 2 September 2014

लंदन २०१४: london 2014

पिछले सप्ताह लंदन गए थे एक कांफ्रेंस के लिए तो सोचे की सप्ताहांत निकाल के थोड़ा घूमें। वैसे तो लंदन पहले भी घूमे हैं (पिछले साल के कांफ्रेंस के बाद सप्ताहांत निकाल के) लेकिन इस बार कुछ अलगे पर्पस था। पिछले बार लन्दन का सब मशूर लोकेशन पर गए थे। इस बार विचार था कि कुछ मार्केट घूमा जाये। मने मॉल ताल नै। हाट बाज़ार घूमने का विचार हुआ। हमलोग अक्सर हिन्दुस्तान में सोचते हैं कि लंदन जइसन जगह में सब लोग चमकौए दोकान में जाता होगा। ऐसा बात नै है लेकिन। सब शहर में हाट बाज़ार लगता है।  अ लंदन मैं ऐसा ढेरे हाट बाजार है। कुछ सप्ताह भर लगा रहता है अ कुछ खाली सप्ताहांत में ही लगता है। दिल्लीयो में तो अलग अलग हाट का अलग अलग दिन फिक्स है।  

त बस हो गया डिसिशन। इंटरनेट से लिस्ट निकाले बेस्ट सड़कछाप बाज़ार का।  अ मेट्रो (लंदन में लोग मेट्रो को ट्यूब कहता है) का नक्सा निकाल के प्लानिंग कर लिए। पिछले बार के जैसा इस बात भी सोचे कि एक जगह उतरेंगे अ वहां से पैदले पैदल और सब जगह चलेंगे। अंडरग्राउंड मेट्रो से सब जगह थोड़े देख पाएंगे। पैदल पैदल ढेर जगहो देख लेंगे अ पैसो बच जाएगा (हिंदुस्तानी आदमी तो कंजूस होबे न करता है, अ हम ठहरे बिहारी; डबल कंजूस)। जाने का विचार था ५-६ गो मार्केट लेकिन कुछ कन्फूजन होने के कारण ३-४ जगह ही जा पाए। पहले गए Old Spitalfields मार्केट। उसके बाद Brick Lane। तब Columbia Road Flower मार्केट। अ अंत में Covent Garden। कोलंबिया रोड मार्केट मेरे पहुचने तक उठ गया था इसलिए देख नै पाये लेकिन और तीनो बेहतरीन था। बेस्ट रहा ब्रिक लेन जो अपने आप में एक आर्ट गैलेरी के तरह है। तरह तरह का ग्राफिटी दिवाल पर सब जगह। मन खुश हो गया देख के। ब्रिक लेन पुराने समय से बांग्लादेशी प्रवासियों का घर रहा है और यहाँ का सड़क सब बांग्लादेशी रेस्तौरेंट से पटी हुई हैं। एक दोस्त कहा कि यहाँ लंदन की सबसे बढ़िया करी (अंग्रेज लोग सब हिंदुस्तानी खाना को करिये कहता है) मिलता है। अगले बार मौका लगा तो ट्राय करेंगे। ओल्ड स्पैटलफील्ड्स कपड़ा, गहना अ एंटीक सामान के लिए मसहूर है। अ कॉवेन्ट गार्डन में भी ओल्ड स्पैटलफील्ड्स जैसा ही सामान मिलता है लेकिन यहाँ सड़क पर बहुत कलाकार लोग करतब अ खेल-तमाशा दिखाते रहता है। इ खास बात है कॉवेन्ट गार्डन का। त खिस्सा त सुन लिए अब फोटो देखिये तीनो जगह का। 
  
ओल्ड स्पैटलफील्ड के अंदर हाट का नज़ारा

ओल्ड स्पैटलफील्ड में बैग का दुकान

Wednesday, 1 January 2014

its a wrap

As it is time to wrap another year, it might be a good plan (at least for me) take a look at the year gone by. Actually the year has already been wrapped. I wanted to post this last night but sorting photographs always takes a lot of time. I have tried to choose one or two moments that defined the particular months to string the year together. Anyway, here it goes:

The new year was ringed-in in the usual fashion - by sleeping through it. That is the tradition I follow every year. Although, there was something different this year. After several years I was welcoming the new year with my parents in my home town. That of course made everything more exciting.

January

In January I was on fieldwork and visited this very old (pre independence) house. Its roof was built on a mesh of bamboo sticks which have never been replaced and repaired. In the photograph we can see the windows just near the roof. I was told that this is a good way to distinguish old houses from the new. People preferred high windows in the old days to keep their female family members 'safe' and also for privacy. The windows were operated by two long ropes by pulling one to open and the other to close. Of course in the new houses people build the windows at a much lower level.